जिजाऊ गर्भसंस्कार केंद्र का उद्देश्य 'गर्भ-संस्कार' कहा कि कई चीजें हमारे सामने आती हैं। माता-पिता के दिमाग में क्या करना है इसके बारे में अनेक भ्रम है। संस्कार का मतलब निरंतर प्रयास है। यह संस्कृत (संस्कारोही गुणांतराधानाम...।) की परिभाषा में कहा जाता है। संस्कार बुरे गुणों में अच्छे गुणों को बदलने का साधन हैं। हर मां, पिताजी का मानना है कि उनके बच्चे में कृष्ण,शिवाजी, राम और स्वामी विवेकानंद के समान गुण होना चाहिए, लेकिन इन सभी के बारे में क्या गुण चाहिये ये ,नहीं कहा जा सकता है।इन सभी चीजों में परिशुद्धता लाने के लिए हम ने आयुर्वेद अभ्यास से प्राणायाम, ध्यान, विश्वास के आधार पर एक अभिनव विधि(sessions) विकसित की गई है। यह विधि उन गुणों को प्राप्त करने में मदद करती है जिन्हें बच्चे में डालने की उम्मीद है।यह समर्पण, धैर्य, क्षमा, कौशल, करुणा, नवीनता, दृढ़ता, आत्मविश्वास, साधक, आज्ञाकारिता, दृढ़ संकल्प, आदि के कई गुण ( 14 विद्या 64 कला)विकसित करने में मदद करता है .. पूरी गर्भावस्था के दौरान पैदा होने वाली मां को खुश रहने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है उसके आस-पास और काम के तनाव को उसके दिमाग को प्रभावित नहीं करना चाहिए, उसे अपने दिमाग में प्रशिक्षित किया जाता है। जैसे एक कुशल शिल्पकार अपने कुशलता और सुसंगत कारागिरी से, एक अशुभ पत्थर को भी एक सुंदर और भावनात्मक मूर्तिकला में बदल देता है। आप भी हमारे आयुर्वेदिक चिकित्सालय मे बताये गये गर्भ संस्कार वर्ग (session) से अपने बच्चे को आपके कुशलता और निरंतर काम से सर्व गुण संपन्न कर सकते हैं। इस के लिए आपके गर्भ संस्कार वर्ग में निरंतरता और समय की आवश्यकता है। अभि के वर्तमान काल के तनावपूर्ण जीवन और परिवेश की दुनिया में डूबना और बनाए रखना अक्सर हमारे हाथों में नहीं होता है।गर्भ में बच्चे को तर्कसंगत (सर्व गुण संपन्न/संस्कारी)बनाना यह हमारे हाथों में है। इन विषयों का विस्तार से अध्ययन गर्भवती महिलाओं को हमारे जिजाऊ गर्भावस्था केंद्र में किया जाता है।पुरे 9 महिने,9 महिनो के बाद सव्वा महिना गर्भिणी महिलाने कोनसी चिजें करणी है कोनसी नहीं करणी ये सब बाते बतलाई जाती है ।नासिक-पूना के निवासी माहिलावो के लिये हर महिने classes लिये जाते है और बहार गाव के माहिलावो को video कॉल और फोन पर संस्कार करणे कि बाते बोली जाती है। वैद्य जीवन जाधव 9860633147